📘 1. Intermediate Technology (मध्यवर्ती प्रौद्योगिकी)
🔹 1. अर्थ (Meaning / परिभाषा)
मध्यवर्ती प्रौद्योगिकी वह तकनीक है जो
परंपरागत (Traditional) तकनीक और आधुनिक पूँजी-प्रधान (Capital Intensive) तकनीक के बीच की होती है।
यह ऐसी तकनीक होती है जो:
- सस्ती हो
- स्थानीय संसाधनों से चल सके
- श्रम-प्रधान हो
- विकासशील देशों की परिस्थितियों के अनुकूल हो
इस अवधारणा को मुख्य रूप से E.F. Schumacher ने अपनी पुस्तक “Small is Beautiful” में विकसित किया।

🔹 2. आवश्यकता / औचित्य (Need for Intermediate Technology)
विकासशील देशों में निम्न समस्याएँ होती हैं:
- पूँजी की कमी
- बेरोजगारी व अर्ध-बेरोजगारी अधिक
- कुशल श्रमिकों की कमी
- आय असमानता
आधुनिक तकनीक:
- बहुत महँगी होती है
- कम लोगों को रोजगार देती है
- विदेशी मुद्रा पर निर्भर होती है
इसलिए ऐसी तकनीक चाहिए जो:
- अधिक रोजगार दे
- कम पूँजी में काम करे
- ग्रामीण व लघु उद्योगों के लिए उपयुक्त हो
🔹 3. विशेषताएँ (Characteristics)
मध्यवर्ती प्रौद्योगिकी की मुख्य विशेषताएँ:
- श्रम-प्रधान (Labour Intensive) – अधिक रोजगार सृजन
- कम पूँजी की आवश्यकता
- स्थानीय संसाधनों का उपयोग
- सरल व आसानी से सीखने योग्य
- रख-रखाव सस्ता
- ग्रामीण व कुटीर उद्योगों के लिए उपयुक्त
- आय वितरण में सुधार
🔹 4. उद्देश्य (Objectives)
मध्यवर्ती प्रौद्योगिकी के प्रमुख उद्देश्य:
- बेरोजगारी कम करना
- ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना
- आय असमानता घटाना
- आत्मनिर्भरता बढ़ाना
- स्थानीय कौशल का विकास
🔹 5. लाभ (Advantages)
- अधिक रोजगार सृजन
- कम लागत में उत्पादन
- ग्रामीण उद्योगों का विकास
- विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम
- संतुलित क्षेत्रीय विकास
- गरीबी उन्मूलन में सहायक
🔹 6. सीमाएँ / आलोचनाएँ (Limitations / Criticism)
मध्यवर्ती प्रौद्योगिकी की कुछ कमियाँ:
- उत्पादन क्षमता कम
- गुणवत्ता कभी-कभी कम
- अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में कमजोर
- धीमी आर्थिक वृद्धि
- बड़े उद्योगों के लिए अनुपयुक्त
कुछ अर्थशास्त्रियों का मत है कि केवल मध्यवर्ती तकनीक से
तेज़ औद्योगिक विकास संभव नहीं है।
🔹 7. निष्कर्ष (Conclusion)
मध्यवर्ती प्रौद्योगिकी विकासशील देशों के लिए अत्यंत उपयोगी है क्योंकि यह:
- रोजगार बढ़ाती है
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है
- सामाजिक न्याय को बढ़ावा देती है
हालाँकि, दीर्घकाल में आधुनिक तकनीक के साथ संतुलन बनाना आवश्यक है।
✨ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
🔹 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:
- मध्यवर्ती प्रौद्योगिकी की अवधारणा समझाइए तथा इसके लाभ व सीमाएँ बताइए।
- Schumacher के मध्यवर्ती प्रौद्योगिकी सिद्धांत की विवेचना कीजिए।
🔹 लघु उत्तरीय प्रश्न:
- Intermediate Technology क्या है?
- मध्यवर्ती और आधुनिक तकनीक में अंतर लिखिए।
- मध्यवर्ती तकनीक के दो लाभ लिखिए।
📘2. Internal and International Migration
(आंतरिक एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन)
🔹 1. प्रवासन का अर्थ (Meaning of Migration)
प्रवासन से आशय है —
किसी व्यक्ति या समूह का स्थायी या अस्थायी रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर निवास हेतु स्थानांतरण करना।

यह स्थानांतरण:
- देश के भीतर हो सकता है → आंतरिक प्रवासन (Internal Migration)
- देश की सीमाओं के पार हो → अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन (International Migration)
🔹 2. प्रवासन के प्रकार (Types of Migration)
(A) आंतरिक प्रवासन (Internal Migration)
देश के भीतर होने वाला प्रवासन:
- ग्रामीण से ग्रामीण
- ग्रामीण से शहरी (सबसे सामान्य)
- शहरी से शहरी
- शहरी से ग्रामीण
(B) अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन (International Migration)
एक देश से दूसरे देश में प्रवासन:
- स्थायी प्रवासन (Permanent)
- अस्थायी प्रवासन (Temporary / Contract Workers)
- कुशल श्रमिक प्रवासन (Brain Drain / Brain Gain)
🔹 3. प्रवासन के कारण (Causes of Migration)
प्रवासन के कारणों को सामान्यतः Push Factors और Pull Factors में बाँटा जाता है।
(A) Push Factors (धकेलने वाले कारण)
- बेरोजगारी व गरीबी
- भूमि की कमी
- कम मजदूरी
- प्राकृतिक आपदाएँ
- सामाजिक उत्पीड़न
(B) Pull Factors (आकर्षित करने वाले कारण)
- बेहतर रोजगार अवसर
- उच्च मजदूरी
- बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य
- शहरी सुविधाएँ
- राजनीतिक स्थिरता
🔹 4. आंतरिक प्रवासन के प्रभाव (Effects of Internal Migration)
(i) सकारात्मक प्रभाव
- बेरोजगारी में कमी
- श्रम का बेहतर उपयोग
- शहरी औद्योगीकरण को बढ़ावा
- ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि
(ii) नकारात्मक प्रभाव
- शहरी भीड़भाड़ व झुग्गी-झोपड़ी समस्या
- बेरोजगारी व अर्ध-बेरोजगारी शहरों में
- ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम की कमी
- सामाजिक समस्याएँ
🔹 5. अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन के प्रभाव (Effects of International Migration)
(i) मूल देश पर प्रभाव
लाभ:
- विदेशी मुद्रा प्रेषण (Remittances)
- बेरोजगारी में कमी
- कौशल का विकास (Brain Gain – वापसी पर)
हानि:
- कुशल श्रमिकों का पलायन (Brain Drain)
- मानव पूँजी की हानि
- विकास की गति धीमी
(ii) गंतव्य देश पर प्रभाव
लाभ:
- सस्ता श्रम
- उत्पादन में वृद्धि
- विविधता व नवाचार
हानि:
- स्थानीय बेरोजगारी
- सांस्कृतिक तनाव
- सामाजिक संघर्ष
🔹 6. प्रवासन और आर्थिक विकास (Migration and Economic Development)
- प्रवासन श्रम बाजार को संतुलित करता है
- ग्रामीण-शहरी आय अंतर को कम करता है
- प्रेषण (Remittances) विकास का महत्वपूर्ण स्रोत हैं
- लेकिन अत्यधिक प्रवासन से शहरी समस्याएँ बढ़ती हैं
इस संदर्भ में Todaro मॉडल महत्वपूर्ण है, जो ग्रामीण-शहरी प्रवासन को अपेक्षित आय (Expected Income) के आधार पर समझाता है।
🔹 7. भारत में प्रवासन की स्थिति (Migration in India – Brief)
- ग्रामीण से शहरी प्रवासन सबसे अधिक
- प्रमुख कारण: रोजगार, विवाह, शिक्षा
- असंगठित क्षेत्र में श्रमिक प्रवासन
- हाल के वर्षों में खाड़ी देशों में श्रमिक प्रवासन
🔹 8. निष्कर्ष (Conclusion)
प्रवासन विकास की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
यह:
- श्रम संसाधनों का बेहतर वितरण करता है
- आय व रोजगार बढ़ाता है
लेकिन संतुलित क्षेत्रीय विकास व रोजगार सृजन द्वारा
अत्यधिक प्रवासन को नियंत्रित करना आवश्यक है।
✨ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
🔹 दीर्घ उत्तरीय:
- आंतरिक एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन की व्याख्या कीजिए तथा इनके आर्थिक प्रभाव बताइए।
- प्रवासन के कारणों एवं परिणामों का विश्लेषण कीजिए।
- Todaro मॉडल के संदर्भ में ग्रामीण-शहरी प्रवासन समझाइए।
🔹 लघु उत्तरीय:
- Internal Migration क्या है?
- Brain Drain से क्या तात्पर्य है?
- Remittances का अर्थ लिखिए।
- Push और Pull Factors समझाइए।
📘 3. विकास नियोजन में इनपुट–आउटपुट विश्लेषण की भूमिका
(Role of Input–Output Analysis in Development Planning)
🔹 1. परिचय / अर्थ (Introduction / Meaning)
इनपुट–आउटपुट विश्लेषण एक ऐसी सांख्यिकीय एवं गणितीय विधि है जिसके द्वारा अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों (उद्योगों) के बीच
परस्पर निर्भरता (Interdependence) का अध्ययन किया जाता है।

इसका विकास प्रसिद्ध अर्थशास्त्री वासिली लेओन्टीफ (Wassily Leontief) ने किया था।

इस विश्लेषण में यह दिखाया जाता है कि:
- एक उद्योग कितना इनपुट लेता है
- और कितना आउटपुट अन्य उद्योगों को देता है
🔹 2. विकास नियोजन में इनपुट–आउटपुट विश्लेषण का महत्व
विकास नियोजन में यह विधि योजनाकारों को यह समझने में सहायता देती है कि
किस क्षेत्र में निवेश करने से पूरे अर्थतंत्र पर अधिक प्रभाव पड़ेगा।
🔹 3. प्रमुख भूमिकाएँ / उपयोग (Major Roles / Uses)
(1) क्षेत्रीय परस्पर निर्भरता का अध्ययन
यह बताता है कि:
- कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं
- किसी एक क्षेत्र के विस्तार का अन्य क्षेत्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा
(2) उत्पादन योजना (Production Planning)
- यह निर्धारित करने में सहायता करता है कि
किसी लक्ष्य उत्पादन के लिए
विभिन्न क्षेत्रों में कितना उत्पादन आवश्यक होगा। - इससे संसाधनों का वैज्ञानिक आवंटन संभव होता है।
(3) निवेश प्राथमिकताओं का निर्धारण (Determination of Investment Priorities)
- यह पहचानने में मदद करता है कि
कौन-से मुख्य क्षेत्र (Key Sectors) हैं
जिनमें निवेश से अधिक गुणक प्रभाव (Multiplier Effect) मिलेगा। - भारी उद्योग, ऊर्जा, परिवहन जैसे क्षेत्रों की पहचान आसान होती है।
(4) संतुलित आर्थिक विकास (Balanced Economic Development)
- यह विभिन्न क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
- किसी क्षेत्र की उपेक्षा से उत्पन्न बाधाओं (Bottlenecks) की पहचान होती है।
(5) रोजगार योजना में सहायक (Employment Planning)
- यह दिखाता है कि
किस क्षेत्र में विस्तार से कितना रोजगार सृजन होगा। - श्रम-प्रधान क्षेत्रों की पहचान में मदद करता है।
(6) आय और उत्पादन पूर्वानुमान (Forecasting of Income and Output)
- राष्ट्रीय आय, उत्पादन वृद्धि, क्षेत्रीय उत्पादन का
अनुमान लगाने में सहायक। - पंचवर्षीय योजनाओं में लक्ष्य निर्धारण में उपयोगी।
(7) आयात–निर्यात योजना (Trade Planning)
- यह बताता है कि
किन क्षेत्रों में आयात निर्भरता अधिक है। - आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution) नीति बनाने में सहायक।
- निर्यातोन्मुख उद्योगों की पहचान करता है।
(8) संसाधनों का कुशल उपयोग (Efficient Use of Resources)
- कच्चे माल, ऊर्जा, पूँजी और श्रम का
सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करता है। - अपव्यय कम करता है।
🔹 4. भारत में इनपुट–आउटपुट विश्लेषण का प्रयोग
भारत में:
- योजना आयोग (अब नीति आयोग)
- केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO)
द्वारा पंचवर्षीय योजनाओं में:
- औद्योगिक संरचना विश्लेषण
- क्षेत्रीय विकास
- निवेश योजना
के लिए इनपुट–आउटपुट तालिकाओं का उपयोग किया गया।
🔹 5. सीमाएँ / आलोचनाएँ (Limitations / Criticism)
इनपुट–आउटपुट विश्लेषण की प्रमुख सीमाएँ:
- स्थिर तकनीकी गुणांक की धारणा – तकनीक समय के साथ बदलती है।
- डेटा संग्रह कठिन व महँगा
- मूल्य परिवर्तन को नजरअंदाज करता है
- आपूर्ति बाधाओं को पूरी तरह नहीं दर्शाता
- गतिशील परिवर्तन (Dynamic Changes) का अभाव
🔹 6. निष्कर्ष (Conclusion)
इनपुट–आउटपुट विश्लेषण विकास नियोजन का एक अत्यंत उपयोगी उपकरण है क्योंकि यह:
- क्षेत्रीय परस्पर निर्भरता समझाता है
- निवेश व उत्पादन योजना में सहायता करता है
- संतुलित विकास को बढ़ावा देता है
हालाँकि इसकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए इसे
अन्य विधियों के साथ मिलाकर प्रयोग करना चाहिए।
✨ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
🔹 दीर्घ उत्तरीय:
- विकास नियोजन में इनपुट–आउटपुट विश्लेषण की भूमिका की विवेचना कीजिए।
- Leontief के इनपुट–आउटपुट मॉडल का विकास नियोजन में महत्व बताइए।
🔹 लघु उत्तरीय:
- Input–Output Analysis क्या है?
- Key Sector से क्या तात्पर्य है?
- Multiplier Effect समझाइए।
📘 4. Export–Led Growth Theory
(तुलनात्मक लाभ सिद्धांत पर आधारित निर्यात-नेतृत्व विकास सिद्धांत)
🔹 1. परिचय / अर्थ (Introduction / Meaning)
Export–Led Growth Theory के अनुसार किसी देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख साधन
निर्यात का विस्तार (Expansion of Exports) होता है।

इस सिद्धांत की बुनियाद रिकार्डो के तुलनात्मक लाभ सिद्धांत (Comparative Advantage Theory) पर आधारित है, जिसके अनुसार:
प्रत्येक देश को उन्हीं वस्तुओं के उत्पादन व निर्यात में विशेषज्ञता प्राप्त करनी चाहिए
जिनमें उसका तुलनात्मक लाभ हो।
इससे:
- संसाधनों का कुशल उपयोग
- उत्पादन में वृद्धि
- आय व रोजगार में वृद्धि
- तीव्र आर्थिक विकास संभव होता है।
🔹 2. तुलनात्मक लाभ सिद्धांत का संक्षिप्त विवेचन
डेविड रिकार्डो के अनुसार:
- प्रत्येक देश कुछ वस्तुएँ कम अवसर लागत पर उत्पादित कर सकता है।
- ऐसे ही वस्तुओं का निर्यात करने से
दोनों देशों को लाभ होता है।
यही विचार Export–Led Growth का सैद्धांतिक आधार है।
🔹 3. Export–Led Growth के मुख्य तत्त्व (Main Elements)
- निर्यात में विशेषज्ञता (Export Specialization)
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का विस्तार
- खुली व्यापार नीति (Trade Liberalization)
- विदेशी मुद्रा अर्जन
- विदेशी निवेश व तकनीक का प्रवाह
🔹 4. Export–Led Growth के तंत्र (Mechanism / Working)
निर्यात-नेतृत्व विकास इस प्रकार कार्य करता है:
- निर्यात बढ़ता है →
- विदेशी मुद्रा अर्जित होती है →
- आयात मशीनरी व तकनीक संभव होती है →
- उत्पादन क्षमता बढ़ती है →
- रोजगार व आय बढ़ती है →
- समग्र आर्थिक वृद्धि होती है
इसके अतिरिक्त:
- बड़े अंतर्राष्ट्रीय बाजार मिलने से
Economies of Scale प्राप्त होती हैं। - प्रतिस्पर्धा से दक्षता बढ़ती है।
🔹 5. लाभ / महत्व (Advantages / Importance)
(1) संसाधनों का कुशल उपयोग
- तुलनात्मक लाभ के अनुसार उत्पादन से
उत्पादकता बढ़ती है।
(2) विदेशी मुद्रा अर्जन
- पूँजीगत वस्तुओं के आयात में सहायता।
(3) औद्योगीकरण को बढ़ावा
- निर्यात उद्योगों का तीव्र विकास।
(4) रोजगार सृजन
- श्रम-प्रधान निर्यात उद्योगों में अधिक रोजगार।
(5) तकनीकी प्रगति
- विदेशी तकनीक व प्रबंधन कौशल का हस्तांतरण।
(6) आर्थिक वृद्धि में तेजी
- कई एशियाई देशों (जापान, कोरिया, ताइवान, चीन) का अनुभव।
🔹 6. विकासशील देशों के लिए प्रासंगिकता
विकासशील देशों में:
- घरेलू बाजार सीमित होते हैं
- पूँजी व तकनीक की कमी होती है
इसलिए:
- निर्यात से विदेशी मुद्रा
- निवेश के संसाधन
- विकास का मार्ग मिलता है
🔹 7. आलोचनाएँ / सीमाएँ (Criticism / Limitations)
Export–Led Growth Theory की प्रमुख आलोचनाएँ:
(1) प्राथमिक वस्तुओं पर निर्भरता
- कई विकासशील देश कच्चे माल का निर्यात करते हैं
- इनके दाम अस्थिर होते हैं (Prebisch–Singer Thesis)
(2) Terms of Trade में गिरावट
- समय के साथ विकासशील देशों की व्यापार शर्तें बिगड़ती हैं।
(3) बाह्य बाजार पर अत्यधिक निर्भरता
- वैश्विक मंदी का सीधा प्रभाव।
(4) घरेलू उद्योगों की उपेक्षा
- आयात प्रतिस्पर्धा से छोटे उद्योग नष्ट हो सकते हैं।
(5) असमान विकास
- निर्यात क्षेत्र तेजी से बढ़ते हैं,
अन्य क्षेत्र पीछे रह जाते हैं।
🔹 8. निष्कर्ष (Conclusion)
Export–Led Growth Theory आर्थिक विकास का एक प्रभावी मार्ग है, विशेषकर तब जब:
- देश को अपने तुलनात्मक लाभ का सही ज्ञान हो
- विविधीकृत निर्यात संरचना हो
- उपयुक्त औद्योगिक व व्यापार नीतियाँ अपनाई जाएँ
हालाँकि, केवल निर्यात पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण है, इसलिए
निर्यात–नेतृत्व एवं घरेलू माँग–आधारित विकास के बीच संतुलन आवश्यक है।
✨ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
🔹 दीर्घ उत्तरीय:
- तुलनात्मक लाभ सिद्धांत के आधार पर निर्यात-नेतृत्व विकास सिद्धांत की व्याख्या कीजिए तथा इसकी सीमाएँ बताइए।
- Export–Led Growth की भूमिका विकासशील देशों में स्पष्ट कीजिए।
🔹 लघु उत्तरीय:
- Export–Led Growth से क्या तात्पर्य है?
- Comparative Advantage क्या है?
- Economies of Scale का अर्थ बताइए।
- Terms of Trade क्या है?
📘 5. Todaro Model
(ग्रामीण–शहरी प्रवासन का टोडारो मॉडल)

🔹 1. परिचय / अर्थ (Introduction / Meaning)
Todaro Model का प्रतिपादन प्रसिद्ध अर्थशास्त्री Michael P. Todaro ने किया।

यह मॉडल यह समझाने का प्रयास करता है कि:
विकासशील देशों में लोग बेरोजगारी के बावजूद
ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर प्रवासन क्यों करते हैं।
इस मॉडल का मुख्य आधार है —
अपेक्षित आय (Expected Income)।
🔹 2. मूल धारणा (Basic Idea)
Todaro के अनुसार प्रवासन का निर्णय इस पर निर्भर करता है कि:
- शहरी क्षेत्र में मिलने वाली अपेक्षित आय
ग्रामीण क्षेत्र की वास्तविक आय से अधिक है या नहीं।
भले ही:
- शहरी बेरोजगारी अधिक हो
- नौकरी मिलने की संभावना कम हो
यदि:
(शहरी मजदूरी × रोजगार मिलने की संभावना)
ग्रामीण मजदूरी
तो प्रवासन होगा।
🔹 3. अपेक्षित आय की अवधारणा (Concept of Expected Income)
अपेक्षित आय = शहरी मजदूरी × रोजगार मिलने की संभावना
जहाँ:
- शहरी मजदूरी = निश्चित शहरी वेतन दर
- रोजगार मिलने की संभावना =
(शहरी रोजगार / शहरी श्रमबल)
ग्रामीण मजदूरी = ग्रामीण क्षेत्र की औसत आय
यदि:
अपेक्षित शहरी आय > ग्रामीण आय → प्रवासन
अपेक्षित शहरी आय ≤ ग्रामीण आय → प्रवासन नहीं
🔹 4. मॉडल की प्रमुख मान्यताएँ (Assumptions)
Todaro मॉडल की मुख्य मान्यताएँ:
- ग्रामीण व शहरी मजदूरी में अंतर होता है
- शहरी मजदूरी संस्थागत रूप से न्यूनतम मजदूरी से ऊपर स्थिर रहती है
- ग्रामीण मजदूरी लचीली (Flexible) होती है
- श्रमिक तर्कसंगत (Rational) होते हैं
- प्रवासन निर्णय व्यक्तिगत आय-लाभ गणना पर आधारित है
- शहरी बेरोजगारी या अर्ध-बेरोजगारी मौजूद रहती है
🔹 5. मॉडल का कार्य तंत्र (Working of the Model)
क्रम इस प्रकार है:
- शहरी मजदूरी ग्रामीण मजदूरी से अधिक होती है
- लोग शहर की ओर प्रवासन करते हैं
- शहर में रोजगार सीमित होते हैं
- बेरोजगारी बढ़ती है
- रोजगार मिलने की संभावना घटती है
- अपेक्षित आय धीरे-धीरे घटती है
- जब: अपेक्षित शहरी आय = ग्रामीण आय
तब प्रवासन रुक जाता है
इसे प्रवासन संतुलन (Migration Equilibrium) कहते हैं।
🔹 6. प्रमुख निष्कर्ष (Main Conclusions)
- केवल शहरी मजदूरी बढ़ाने से प्रवासन बढ़ेगा
- शहरी रोजगार सृजन से भी प्रवासन बढ़ सकता है
- शहरी बेरोजगारी प्रवासन का परिणाम है, न कि कारण
- प्रवासन तब तक चलता रहेगा जब तक अपेक्षित आय बराबर न हो जाए
🔹 7. नीतिगत निष्कर्ष (Policy Implications)
Todaro मॉडल से प्राप्त प्रमुख नीतिगत सुझाव:
(1) केवल शहरी औद्योगीकरण पर्याप्त नहीं
- इससे प्रवासन और बेरोजगारी बढ़ेगी
(2) ग्रामीण विकास आवश्यक
- ग्रामीण रोजगार योजनाएँ
- कृषि उत्पादकता वृद्धि
- ग्रामीण उद्योग
(3) शहरी मजदूरी नियंत्रण
- अत्यधिक न्यूनतम मजदूरी प्रवासन को बढ़ाती है
(4) संतुलित क्षेत्रीय विकास
- छोटे शहरों व कस्बों का विकास
🔹 8. आलोचनाएँ / सीमाएँ (Criticism / Limitations)
Todaro मॉडल की प्रमुख आलोचनाएँ:
- श्रमिकों को अत्यधिक तर्कसंगत मानता है
- सामाजिक कारणों की उपेक्षा (शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन-शैली)
- सूचना पूर्ण मान ली गई है
- प्रवासन केवल आर्थिक नहीं होता
- अनौपचारिक क्षेत्र की भूमिका को कम आँका गया
🔹 9. निष्कर्ष (Conclusion)
Todaro मॉडल ग्रामीण–शहरी प्रवासन की व्याख्या का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
इसने यह स्पष्ट किया कि:
- प्रवासन केवल मजदूरी अंतर से नहीं
- बल्कि अपेक्षित आय से प्रेरित होता है।
यह मॉडल विकास नीति निर्माण में आज भी अत्यंत उपयोगी है।
✨ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
🔹 दीर्घ उत्तरीय:
- Todaro मॉडल की व्याख्या कीजिए तथा इसके नीतिगत निष्कर्ष बताइए।
- ग्रामीण–शहरी प्रवासन के Todaro मॉडल की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।
🔹 लघु उत्तरीय:
- Expected Income क्या है?
- Migration Equilibrium से क्या तात्पर्य है?
- Todaro मॉडल का मुख्य निष्कर्ष लिखिए।
📘 6. Meade (Harrod–Domar Growth Model)
(मीड़ – हैरोड–डोमर आर्थिक वृद्धि मॉडल)

🔹 1. परिचय (Introduction)
आर्थिक वृद्धि के प्रारम्भिक गतिशील मॉडलों में
Roy F. Harrod और Evsey Domar द्वारा प्रतिपादित मॉडल अत्यंत प्रसिद्ध है।
बाद में James E. Meade ने इस मॉडल का विस्तार एवं परिष्कार किया,
इसलिए कई पाठ्यक्रमों में इसे Meade (Harrod–Domar) Model कहा जाता है।
यह मॉडल यह बताने का प्रयास करता है कि:
- पूँजी संचय (Capital Accumulation)
- बचत (Saving)
- निवेश (Investment)
आर्थिक वृद्धि की दर को कैसे निर्धारित करते हैं।
🔹 2. मॉडल का उद्देश्य (Objective)
इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य है:
- स्थिर व संतुलित आर्थिक वृद्धि की शर्तें ज्ञात करना
- यह समझाना कि अर्थव्यवस्था में अस्थिरता क्यों उत्पन्न होती है
🔹 3. प्रमुख मान्यताएँ (Assumptions)
Harrod–Domar–Meade मॉडल की मुख्य मान्यताएँ:
- बंद अर्थव्यवस्था (Closed Economy)
- सरकार की भूमिका नगण्य
- केवल एक वस्तु का उत्पादन
- स्थिर पूँजी–उत्पादन अनुपात (Fixed Capital–Output Ratio)
- स्थिर बचत दर (Constant Saving Rate)
- पूर्ण रोजगार की प्रवृत्ति
- तकनीक में कोई परिवर्तन नहीं
- निवेश = बचत
🔹 4. वृद्धि की तीन दरें (Three Rates of Growth)
इस मॉडल में तीन प्रकार की वृद्धि दरें बताई गई हैं:
(1) वास्तविक वृद्धि दर (Actual Growth Rate – Ga)
जो अर्थव्यवस्था वास्तव में प्राप्त करती है।
(2) वारंटेड वृद्धि दर (Warranted Growth Rate – Gw)
वह वृद्धि दर जिस पर:
- निवेशकों की अपेक्षाएँ पूरी होती हैं
- उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग होता है
सूत्र:
Gw = s / v
जहाँ:
s = बचत की दर
v = पूँजी–उत्पादन अनुपात
(3) प्राकृतिक वृद्धि दर (Natural Growth Rate – Gn)
वह अधिकतम वृद्धि दर जिस पर:
- जनसंख्या वृद्धि
- श्रम वृद्धि
- तकनीकी प्रगति
के कारण अर्थव्यवस्था बढ़ सकती है।
🔹 5. स्थिरता की समस्या (Problem of Instability)
Harrod–Domar–Meade मॉडल का मुख्य निष्कर्ष:
अर्थव्यवस्था केवल तभी संतुलन में रहती है जब
Ga = Gw = Gn
लेकिन यह स्थिति बहुत दुर्लभ होती है।
यदि:
- Ga > Gw → अति-निवेश, मुद्रास्फीति (जब मुद्रास्फीति होती है, तो उसी पैसे से कम वस्तुएं या सेवाएं खरीदी जा सकती हैं।)
- Ga < Gw → मंदी, बेरोजगारी
इसे ही Knife–Edge Instability कहा जाता है —
अर्थव्यवस्था एक धार पर चलती है,
थोड़ा भी विचलन उसे असंतुलन में डाल देता है।
🔹 6. Meade का योगदान (Contribution of Meade)
James Meade ने इस मॉडल में:
- जनसंख्या वृद्धि को अधिक स्पष्ट रूप से जोड़ा
- पूर्ण रोजगार की समस्या पर बल दिया
- दीर्घकालीन संतुलन वृद्धि की शर्तें बताईं
Meade ने यह दिखाया कि:
- यदि निवेश, जनसंख्या और तकनीक में उचित समन्वय हो
- तो स्थिर वृद्धि संभव है
🔹 7. विकासशील देशों के लिए महत्व (Relevance for Developing Countries)
यह मॉडल विकासशील देशों के लिए उपयोगी है क्योंकि:
- पूँजी की भूमिका स्पष्ट करता है
- बचत व निवेश को विकास का आधार मानता है
- योजना निर्माण (Five Year Plans) में सहायक रहा
भारत की प्रारम्भिक पंचवर्षीय योजनाएँ
इसी विचारधारा से प्रभावित थीं।
🔹 8. आलोचनाएँ / सीमाएँ (Criticism / Limitations)
इस मॉडल की प्रमुख आलोचनाएँ:
- पूँजी–उत्पादन अनुपात स्थिर मानना अवास्तविक
- तकनीकी प्रगति की उपेक्षा
- प्रतिस्थापन की संभावना नहीं (No Factor Substitution)
- Knife–Edge अस्थिरता अत्यधिक कठोर धारणा
- कीमतों की भूमिका की उपेक्षा
🔹 9. निष्कर्ष (Conclusion)
Meade (Harrod–Domar) मॉडल आर्थिक वृद्धि के सिद्धांत में एक मील का पत्थर है।
इसने यह स्पष्ट किया कि:
- बचत और निवेश वृद्धि के मुख्य निर्धारक हैं
- संतुलित वृद्धि अत्यंत कठिन है
हालाँकि, इसकी सीमाओं के कारण बाद में
Solow, Endogenous Growth Models विकसित किए गए।
✨ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
🔹 दीर्घ उत्तरीय:
- Harrod–Domar (Meade) मॉडल की व्याख्या कीजिए तथा इसकी आलोचना कीजिए।
- Knife–Edge Instability की अवधारणा समझाइए।
🔹 लघु उत्तरीय:
- Warranted Growth Rate क्या है?
- Natural Growth Rate से क्या तात्पर्य है?
- पूँजी–उत्पादन अनुपात का अर्थ लिखिए।
📘 7. New Endogenous Growth Model
(Romer और Lucas मॉडल)
🔹 1. परिचय / अर्थ (Introduction / Meaning)
Endogenous Growth Theory वह सिद्धांत है जिसमें आर्थिक वृद्धि को
अर्थव्यवस्था के भीतर के कारकों (Endogenous Factors) से समझाया जाता है, जैसे:

- मानव पूँजी (Human Capital)
- ज्ञान (Knowledge)
- अनुसंधान एवं विकास (R&D)
- नवाचार (Innovation)
इसके प्रमुख प्रवर्तक हैं:
- Paul Romer (1986, 1990)
- Robert Lucas (1988)
इन मॉडलों का विकास
Solow के बाह्य तकनीकी प्रगति मॉडल की सीमाओं को दूर करने के लिए किया गया।
🔹 2. Solow मॉडल से अंतर (Need for Endogenous Growth Models)
Solow मॉडल में:
- तकनीकी प्रगति को बाह्य (Exogenous) माना गया
- दीर्घकालीन वृद्धि की व्याख्या अधूरी रही
Romer और Lucas ने बताया कि:
तकनीकी प्रगति, ज्ञान और मानव पूँजी
स्वयं आर्थिक निर्णयों का परिणाम हैं।
🔹 3. Romer मॉडल (Innovation और Knowledge आधारित)
🔹 (A) मूल विचार
Romer के अनुसार:
- ज्ञान एक ऐसा कारक है जो
बढ़ते प्रतिफल (Increasing Returns) उत्पन्न करता है। - ज्ञान में निवेश से
स्थायी आर्थिक वृद्धि संभव है।
🔹 (B) प्रमुख मान्यताएँ
- अर्थव्यवस्था में R&D क्षेत्र मौजूद
- ज्ञान सार्वजनिक वस्तु के समान (Non-rival)
- निजी कंपनियाँ अनुसंधान में निवेश करती हैं
- अपूर्ण प्रतिस्पर्धा (Monopolistic Competition)
- तकनीकी प्रगति अंतर्जात
🔹 (C) कार्य प्रणाली (Mechanism)
- कंपनियाँ R&D में निवेश करती हैं →
- नया ज्ञान व नई तकनीक विकसित होती है →
- उत्पादकता बढ़ती है →
- उत्पादन व आय बढ़ती है →
- पुनः R&D में निवेश →
- दीर्घकालीन स्थायी वृद्धि
🔹 (D) प्रमुख निष्कर्ष
- तकनीकी प्रगति स्वयं आर्थिक प्रणाली से उत्पन्न होती है
- ज्ञान में निवेश से स्थायी वृद्धि संभव
- सरकारी नीतियाँ (शिक्षा, R&D सब्सिडी, पेटेंट) वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं
🔹 4. Lucas मॉडल (Human Capital आधारित)
🔹 (A) मूल विचार
Lucas के अनुसार:
मानव पूँजी (शिक्षा, कौशल, प्रशिक्षण)
आर्थिक वृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।
उन्होंने बताया कि:
- श्रमिक जितना अधिक सीखते हैं
- उत्पादकता उतनी अधिक बढ़ती है
🔹 (B) प्रमुख मान्यताएँ
- मानव पूँजी में निवेश संभव
- सीखना करते हुए (Learning by Doing)
- मानव पूँजी से बाह्य लाभ (Externalities) उत्पन्न होते हैं
- तकनीकी प्रगति अंतर्जात
🔹 (C) कार्य प्रणाली
- व्यक्ति शिक्षा व प्रशिक्षण में समय लगाते हैं →
- मानव पूँजी बढ़ती है →
- श्रम उत्पादकता बढ़ती है →
- उत्पादन बढ़ता है →
- अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर स्थायी होती है
इसके साथ:
- एक व्यक्ति की शिक्षा से दूसरों को भी लाभ (Spillover Effect)
🔹 (D) प्रमुख निष्कर्ष
- मानव पूँजी में निरंतर निवेश से
दीर्घकालीन वृद्धि संभव - शिक्षा नीति वृद्धि की कुंजी है
- आय असमानता मानव पूँजी निवेश को प्रभावित कर सकती है
🔹 5. Romer और Lucas मॉडलों की समानताएँ
- तकनीकी प्रगति अंतर्जात
- बढ़ते प्रतिफल (Increasing Returns)
- Externalities की भूमिका
- सरकारी नीति का महत्वपूर्ण प्रभाव
- दीर्घकालीन स्थायी वृद्धि संभव
🔹 6. विकासशील देशों के लिए महत्व (Relevance for Developing Countries)
ये मॉडल बताते हैं कि:
- केवल पूँजी संचय पर्याप्त नहीं
- शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल व R&D में निवेश आवश्यक
- सरकारी हस्तक्षेप विकास को तेज कर सकता है
भारत जैसे देशों में:
- Skill Development
- Higher Education
- Innovation Policy
इसी विचारधारा पर आधारित हैं।
🔹 7. आलोचनाएँ / सीमाएँ (Criticism / Limitations)
Romer–Lucas मॉडलों की प्रमुख आलोचनाएँ:
- गणितीय रूप से अत्यधिक जटिल
- वास्तविक अर्थव्यवस्था से कभी-कभी दूर
- संस्थागत कारकों की सीमित भूमिका
- Externalities का मापन कठिन
- सभी देशों पर समान रूप से लागू नहीं
🔹 8. निष्कर्ष (Conclusion)
Romer और Lucas के नव अंतर्जात वृद्धि मॉडल
आधुनिक आर्थिक वृद्धि सिद्धांत की रीढ़ हैं।
इन्होंने यह स्पष्ट किया कि:
- ज्ञान और मानव पूँजी विकास की आत्मा हैं
- सरकारी नीति वृद्धि की दिशा बदल सकती है
इसी कारण इन्हें
New Growth Theory कहा जाता है।
✨ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
🔹 दीर्घ उत्तरीय:
- Romer और Lucas के Endogenous Growth Models की व्याख्या कीजिए।
- Solow मॉडल से New Growth Theory की तुलना कीजिए।
🔹 लघु उत्तरीय:
- Endogenous Growth से क्या तात्पर्य है?
- Human Capital क्या है?
- Increasing Returns का अर्थ बताइए।
- Spillover Effect क्या है?
📘 8. Macroeconomic Determinants of Growth
(आर्थिक वृद्धि के समष्टि–आर्थिक निर्धारक)
🔹 1. परिचय / अर्थ (Introduction / Meaning)
आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) से तात्पर्य है —
किसी देश के वास्तविक राष्ट्रीय आय या प्रति व्यक्ति आय में दीर्घकालीन वृद्धि।
इस वृद्धि को प्रभावित करने वाले वे व्यापक आर्थिक कारक
जो पूरी अर्थव्यवस्था के स्तर पर कार्य करते हैं,
उन्हें ही समष्टि–आर्थिक निर्धारक (Macroeconomic Determinants) कहा जाता है।
🔹 2. प्रमुख समष्टि–आर्थिक निर्धारक
नीचे आर्थिक वृद्धि के मुख्य निर्धारकों का व्यवस्थित विवरण दिया गया है:

OR

🔹 (1) पूँजी संचय (Capital Accumulation)
- आर्थिक वृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण आधार।
- अधिक बचत → अधिक निवेश → अधिक पूँजी निर्माण → उत्पादन में वृद्धि।
- Harrod–Domar तथा Solow मॉडल में केंद्रीय भूमिका।
महत्व:
- उद्योगों का विस्तार
- अवसंरचना विकास
- उत्पादक क्षमता में वृद्धि
🔹 (2) मानव पूँजी (Human Capital)
- शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और प्रशिक्षण का स्तर।
- कुशल श्रमिक अधिक उत्पादक होते हैं।
महत्व:
- तकनीकी अनुकूलन
- नवाचार में वृद्धि
- Endogenous Growth Models (Lucas, Romer) का आधार।
🔹 (3) तकनीकी प्रगति (Technological Progress)
- उत्पादन विधियों में सुधार
- नई मशीनें, नई तकनीक, नवाचार
प्रकार:
- पूँजी–निरपेक्ष (Neutral)
- श्रम–बचत (Labour Saving)
- पूँजी–बचत (Capital Saving)
महत्व:
- Solow मॉडल में दीर्घकालीन वृद्धि का मुख्य स्रोत।
🔹 (4) बचत और निवेश की दर (Saving and Investment Rate)
- उच्च बचत दर → उच्च निवेश दर → तीव्र वृद्धि।
- घरेलू बचत के साथ विदेशी निवेश भी महत्त्वपूर्ण।
महत्व:
- पूँजी निर्माण
- रोजगार सृजन
- औद्योगिक विकास
🔹 (5) जनसंख्या और श्रम शक्ति (Population and Labour Force)
- श्रम की उपलब्धता उत्पादन को प्रभावित करती है।
- लेकिन अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि प्रति व्यक्ति आय घटा सकती है।
महत्व:
- जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend)
- श्रम–प्रधान उद्योगों का विकास
🔹 (6) प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources)
- भूमि, जल, खनिज, ऊर्जा संसाधन।
- संसाधनों की उपलब्धता औद्योगिक संरचना तय करती है।
महत्व:
- कच्चे माल की उपलब्धता
- निर्यात क्षमता
- क्षेत्रीय विकास
🔹 (7) राजकोषीय नीति (Fiscal Policy)
सरकार की:
- कर नीति
- सार्वजनिक व्यय
- बजट घाटा
महत्व:
- अवसंरचना पर सरकारी निवेश
- शिक्षा–स्वास्थ्य व्यय
- मांग प्रोत्साहन
🔹 (8) मौद्रिक नीति और वित्तीय प्रणाली (Monetary Policy & Financial System)
- ब्याज दर
- ऋण उपलब्धता
- बैंकिंग व पूँजी बाजार
महत्व:
- निवेश को प्रोत्साहन
- संसाधनों का कुशल आवंटन
- वित्तीय स्थिरता
🔹 (9) व्यापार नीति और बाह्य क्षेत्र (Trade Policy & External Sector)
- निर्यात–आयात नीति
- विदेशी निवेश (FDI)
- विनिमय दर नीति
महत्व:
- Export–Led Growth
- विदेशी मुद्रा अर्जन
- तकनीकी हस्तांतरण
🔹 (10) संस्थागत एवं राजनीतिक कारक (Institutional & Political Factors)
- राजनीतिक स्थिरता
- सुशासन (Good Governance)
- कानून व्यवस्था
- संपत्ति अधिकार
महत्व:
- निवेश वातावरण में सुधार
- भ्रष्टाचार में कमी
- दीर्घकालीन विकास सुनिश्चित
🔹 (11) अवसंरचना (Infrastructure)
- परिवहन
- ऊर्जा
- संचार
- डिजिटल ढाँचा
महत्व:
- उत्पादन लागत में कमी
- बाजार एकीकरण
- औद्योगिक विकास
🔹 3. परस्पर संबंध (Interrelationship among Determinants)
ये सभी निर्धारक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं:
- शिक्षा → मानव पूँजी → तकनीकी प्रगति
- अवसंरचना → निवेश → औद्योगिक विकास
- वित्तीय प्रणाली → बचत–निवेश → पूँजी निर्माण
संतुलित नीति द्वारा ही स्थायी वृद्धि संभव है।
🔹 4. विकासशील देशों के लिए विशेष महत्व
विकासशील देशों में:
- पूँजी की कमी
- मानव पूँजी का निम्न स्तर
- अवसंरचना की कमजोरी
- संस्थागत बाधाएँ
इसलिए:
- सरकारी नीति की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती है।
🔹 5. निष्कर्ष (Conclusion)
आर्थिक वृद्धि केवल एक कारक पर निर्भर नहीं होती।
यह अनेक समष्टि–आर्थिक निर्धारकों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है।
स्थायी एवं समावेशी वृद्धि के लिए आवश्यक है कि:
- पूँजी व मानव पूँजी में निवेश हो
- तकनीकी प्रगति को बढ़ावा मिले
- सुदृढ़ संस्थान व स्थिर नीतियाँ अपनाई जाएँ
✨ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
🔹 दीर्घ उत्तरीय:
- आर्थिक वृद्धि के प्रमुख समष्टि–आर्थिक निर्धारकों की विवेचना कीजिए।
- पूँजी संचय, मानव पूँजी और तकनीकी प्रगति की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
🔹 लघु उत्तरीय:
- Capital Accumulation क्या है?
- Human Capital का अर्थ बताइए।
- Demographic Dividend से क्या तात्पर्य है?
- Technological Progress क्या है?
📘 9. Cost–Benefit Analysis (CBA)
(लागत–लाभ विश्लेषण : चरण एवं महत्व)
🔹 1. परिचय / अर्थ (Introduction / Meaning)
Cost–Benefit Analysis एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा किसी
विकास परियोजना या सार्वजनिक निवेश योजना के:
- सभी संभावित लागत (Costs)
- तथा सभी संभावित लाभ (Benefits)
का मौद्रिक रूप में मूल्यांकन किया जाता है,
ताकि यह निर्णय लिया जा सके कि परियोजना सामाजिक दृष्टि से लाभकारी है या नहीं।
यह विशेष रूप से:
- सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं
- अवसंरचना, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य
जैसी योजनाओं में प्रयोग की जाती है।
🔹 2. Cost–Benefit Analysis के उद्देश्य
- परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता जाँचना
- वैकल्पिक परियोजनाओं में श्रेष्ठ का चयन
- सामाजिक कल्याण को अधिकतम करना
- संसाधनों का कुशल आवंटन सुनिश्चित करना
🔹 3. Cost–Benefit Analysis के प्रमुख चरण (Steps of CBA)

🔹 चरण 1: परियोजना की पहचान (Identification of the Project)
- परियोजना का उद्देश्य स्पष्ट करना
- विभिन्न वैकल्पिक परियोजनाओं की पहचान
- परियोजना का क्षेत्र, अवधि व आकार निर्धारित करना
🔹 चरण 2: लागत और लाभ की पहचान (Identification of Costs and Benefits)
(A) लागत के प्रकार:
- प्रारम्भिक लागत (Initial Investment Cost)
- परिचालन एवं रख-रखाव लागत (Operating & Maintenance Cost)
- प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लागत
- सामाजिक लागत (पर्यावरणीय क्षति, विस्थापन)
(B) लाभ के प्रकार:
- प्रत्यक्ष लाभ (उत्पादन, आय, रोजगार)
- अप्रत्यक्ष लाभ (क्षेत्रीय विकास, बाह्य लाभ)
- सामाजिक लाभ (शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण)
🔹 चरण 3: लागत और लाभ का मापन (Measurement of Costs and Benefits)
- सभी लागतों व लाभों को मौद्रिक रूप में व्यक्त करना
- बाजार मूल्य उपलब्ध न हों तो:
- Shadow Prices
- वैकल्पिक लागत (Opportunity Cost)
का प्रयोग करना
🔹 चरण 4: समय आयाम को शामिल करना (Discounting of Future Costs and Benefits)
- भविष्य के लाभ–लागत को
वर्तमान मूल्य (Present Value) में बदलना
सूत्र:
PV = Future Value / (1 + r)ⁿ
जहाँ:
r = छूट दर (Discount Rate)
n = वर्षों की संख्या
🔹 चरण 5: निर्णय मानदंड का प्रयोग (Application of Decision Criteria)
मुख्य मापदंड:
- Net Present Value (NPV)
NPV = कुल वर्तमान लाभ – कुल वर्तमान लागत- NPV > 0 → परियोजना स्वीकार्य
- Benefit–Cost Ratio (BCR)
BCR = कुल वर्तमान लाभ / कुल वर्तमान लागत- BCR > 1 → परियोजना स्वीकार्य
- Internal Rate of Return (IRR)
- वह छूट दर जिस पर NPV = 0
🔹 चरण 6: संवेदनशीलता विश्लेषण (Sensitivity Analysis)
- यदि:
- लागत बढ़ जाए
- लाभ घट जाए
- छूट दर बदले
तो परियोजना कितनी प्रभावित होगी — इसका अध्ययन।
🔹 चरण 7: अंतिम निर्णय (Final Decision)
- विभिन्न परियोजनाओं की तुलना
- सर्वाधिक सामाजिक लाभ देने वाली परियोजना का चयन
🔹 4. Cost–Benefit Analysis का महत्व (Importance of CBA)

🔹 (1) संसाधनों का कुशल आवंटन
- सीमित संसाधनों का
सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करता है।
🔹 (2) सार्वजनिक निवेश के निर्णय में सहायक
- सड़क, बाँध, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य परियोजनाओं में
सरकार को सही निर्णय लेने में सहायता।
🔹 (3) सामाजिक कल्याण को अधिकतम करता है
- केवल निजी लाभ नहीं
- सामाजिक लाभ–लागत पर ध्यान।
🔹 (4) वैकल्पिक परियोजनाओं की तुलना
- कई विकल्पों में
सर्वश्रेष्ठ परियोजना का चयन संभव।
🔹 (5) जोखिम और अनिश्चितता का आकलन
- Sensitivity Analysis द्वारा
जोखिम की पहचान।
🔹 (6) पारदर्शिता और उत्तरदायित्व
- परियोजना चयन में
वैज्ञानिक व निष्पक्ष आधार।
🔹 (7) विकास नियोजन में उपयोगी
- पंचवर्षीय योजनाओं
- अवसंरचना व सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में अत्यंत सहायक।
🔹 5. सीमाएँ / आलोचनाएँ (Brief)
- सामाजिक लाभ–लागत का मापन कठिन
- Shadow Pricing जटिल
- भविष्य की अनिश्चितता
- वितरणात्मक प्रभाव की उपेक्षा
🔹 6. निष्कर्ष (Conclusion)
Cost–Benefit Analysis विकास नियोजन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण है।
यह सुनिश्चित करता है कि:
- परियोजना आर्थिक ही नहीं
- सामाजिक रूप से भी लाभकारी हो।
हालाँकि इसकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए
इसे अन्य विधियों के साथ प्रयोग करना चाहिए।
✨ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
🔹 दीर्घ उत्तरीय:
- Cost–Benefit Analysis के चरणों का वर्णन कीजिए तथा इसके महत्व की विवेचना कीजिए।
- सार्वजनिक परियोजनाओं के मूल्यांकन में CBA की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
🔹 लघु उत्तरीय:
- Shadow Price क्या है?
- Net Present Value से क्या तात्पर्य है?
- Discounting का अर्थ बताइए।
- Benefit–Cost Ratio क्या है?
🌙 Last Night Revision Mind Map – Growth & Development (M.A. Economics)
🧠 मुख्य विषय: Economic Growth & Development
1️⃣ Intermediate Technology (मध्यवर्ती प्रौद्योगिकी)
- अर्थ: पारंपरिक व आधुनिक तकनीक के बीच
- प्रवर्तक: E.F. Schumacher
- विशेषताएँ:
- श्रम-प्रधान
- कम पूँजी
- स्थानीय संसाधन
- उद्देश्य:
- रोजगार सृजन
- ग्रामीण विकास
- लाभ:
- गरीबी उन्मूलन
- आय वितरण में सुधार
- सीमाएँ:
- कम उत्पादन क्षमता
- प्रतिस्पर्धा में कमजोर
2️⃣ Internal & International Migration (आंतरिक व अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन)
- अर्थ: निवास हेतु स्थानांतरण
- प्रकार:
- ग्रामीण–शहरी, शहरी–शहरी
- Brain Drain / Brain Gain
- कारण:
- Push: गरीबी, बेरोजगारी
- Pull: रोजगार, उच्च मजदूरी
- प्रभाव:
- रोजगार वितरण
- शहरी भीड़
- Remittances
3️⃣ Input–Output Analysis in Development Planning
- प्रवर्तक: Wassily Leontief
- अर्थ: क्षेत्रीय परस्पर निर्भरता
- भूमिका:
- उत्पादन योजना
- निवेश प्राथमिकता
- Key Sector पहचान
- रोजगार अनुमान
- भारत में उपयोग: पंचवर्षीय योजनाएँ
- सीमाएँ:
- स्थिर गुणांक
- डेटा कठिन
4️⃣ Export–Led Growth (Comparative Advantage आधारित)
- आधार: Ricardo का तुलनात्मक लाभ सिद्धांत
- तंत्र:
- निर्यात ↑ → विदेशी मुद्रा ↑ → निवेश ↑ → वृद्धि ↑
- लाभ:
- Economies of Scale
- तकनीकी हस्तांतरण
- रोजगार
- सीमाएँ:
- Terms of Trade गिरावट
- बाह्य निर्भरता
- उदाहरण: जापान, कोरिया, चीन
5️⃣ Todaro Model (ग्रामीण–शहरी प्रवासन)
- आधार: Expected Income
- सूत्र:
- अपेक्षित आय = शहरी मजदूरी × रोजगार संभावना
- मान्यताएँ:
- स्थिर शहरी मजदूरी
- तर्कसंगत श्रमिक
- निष्कर्ष:
- शहरी बेरोजगारी = प्रवासन का परिणाम
- नीति:
- ग्रामीण विकास
- मजदूरी नियंत्रण
6️⃣ Meade (Harrod–Domar Growth Model)
- मुख्य तत्व:
- बचत, निवेश, पूँजी अनुपात
- तीन दरें:
- Actual (Ga)
- Warranted (Gw = s/v)
- Natural (Gn)
- मुख्य समस्या:
- Knife–Edge Instability
- महत्व:
- योजना निर्माण में उपयोग
- सीमाएँ:
- तकनीकी प्रगति की उपेक्षा
7️⃣ Romer & Lucas – Endogenous Growth Models
🔹 Romer Model
- आधार: ज्ञान व नवाचार
- तत्व:
- R&D
- Increasing Returns
- तकनीक अंतर्जात
🔹 Lucas Model
- आधार: Human Capital
- तत्व:
- शिक्षा, कौशल
- Spillover Effect
- महत्व:
- दीर्घकालीन स्थायी वृद्धि
- नीति:
- शिक्षा, नवाचार, R&D
8️⃣ Macroeconomic Determinants of Growth
- पूँजी संचय
- मानव पूँजी
- तकनीकी प्रगति
- बचत व निवेश दर
- जनसंख्या व श्रम
- प्राकृतिक संसाधन
- राजकोषीय नीति
- मौद्रिक नीति
- व्यापार नीति
- संस्थागत कारक
- अवसंरचना
9️⃣ Cost–Benefit Analysis (Steps & Importance)
🔹 चरण:
- परियोजना पहचान
- लागत–लाभ पहचान
- मौद्रिक मापन (Shadow Price)
- Discounting
- निर्णय मापदंड:
- NPV
- BCR
- IRR
- Sensitivity Analysis
- अंतिम निर्णय
🔹 महत्व:
- संसाधन आवंटन
- सार्वजनिक निवेश निर्णय
- सामाजिक कल्याण
- वैकल्पिक तुलना
✨ Final Exam Learning Points (9 Important Topics)
1️⃣ Intermediate Technology (मध्यवर्ती प्रौद्योगिकी)
मुख्य सीख / लिखने के बिंदु:
- परंपरागत और आधुनिक तकनीक के बीच की तकनीक
- प्रवर्तक: E.F. Schumacher (Small is Beautiful)
- विकासशील देशों के लिए उपयुक्त तकनीक
- श्रम-प्रधान, कम पूँजी, स्थानीय संसाधन
- उद्देश्य: रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन
- लाभ: आय वितरण सुधार, आत्मनिर्भरता
- सीमा: कम उत्पादन क्षमता, अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में कमजोर
➡️ की-वाक्य:
“Intermediate Technology विकासशील देशों में रोजगार व संतुलित विकास का प्रभावी साधन है।”
2️⃣ Internal & International Migration
मुख्य सीख:
- प्रवासन = निवास हेतु स्थान परिवर्तन
- प्रकार: आंतरिक (ग्रामीण–शहरी), अंतर्राष्ट्रीय
- कारण:
- Push: गरीबी, बेरोजगारी
- Pull: रोजगार, उच्च मजदूरी
- प्रभाव (मूल देश): Remittances, Brain Drain
- प्रभाव (गंतव्य देश): सस्ता श्रम, सामाजिक तनाव
- आर्थिक विकास में भूमिका: श्रम का पुनर्वितरण
➡️ की-वाक्य:
“प्रवासन श्रम संसाधनों के कुशल वितरण में सहायक होता है, पर शहरी समस्याएँ भी उत्पन्न करता है।”
3️⃣ Role of Input–Output Analysis in Development Planning
मुख्य सीख:
- प्रवर्तक: Wassily Leontief
- उद्देश्य: विभिन्न क्षेत्रों की परस्पर निर्भरता का अध्ययन
- भूमिका:
- उत्पादन योजना
- निवेश प्राथमिकता
- Key Sector पहचान
- रोजगार व उत्पादन अनुमान
- भारत में उपयोग: पंचवर्षीय योजनाएँ
- सीमाएँ: स्थिर तकनीकी गुणांक, डेटा समस्या
➡️ की-वाक्य:
“Input–Output Analysis विकास नियोजन में संतुलित क्षेत्रीय विकास का वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।”
4️⃣ Export–Led Growth Theory (Comparative Advantage आधारित)
मुख्य सीख:
- आधार: Ricardo का Comparative Advantage सिद्धांत
- निर्यात विस्तार से आर्थिक वृद्धि
- तंत्र: निर्यात → विदेशी मुद्रा → निवेश → वृद्धि
- लाभ:
- Economies of Scale
- तकनीकी हस्तांतरण
- रोजगार
- सीमाएँ:
- Terms of Trade गिरावट
- बाहरी बाजार पर निर्भरता
➡️ की-वाक्य:
“निर्यात–नेतृत्व विकास विकासशील देशों के लिए तीव्र वृद्धि का साधन है, पर अत्यधिक निर्भरता जोखिमपूर्ण है।”
5️⃣ Todaro Model
मुख्य सीख:
- प्रवर्तक: Michael Todaro
- आधार: Expected Income
- सूत्र:
अपेक्षित आय = शहरी मजदूरी × रोजगार संभावना - निष्कर्ष:
- शहरी बेरोजगारी प्रवासन का परिणाम है
- प्रवासन तब तक जब तक अपेक्षित आय = ग्रामीण आय
- नीति सुझाव:
- ग्रामीण विकास
- शहरी मजदूरी नियंत्रण
➡️ की-वाक्य:
“Todoro मॉडल बताता है कि प्रवासन मजदूरी से नहीं बल्कि अपेक्षित आय से प्रेरित होता है।”
6️⃣ Meade (Harrod–Domar Growth Model)
मुख्य सीख:
- आधार: बचत, निवेश, पूँजी–उत्पादन अनुपात
- तीन वृद्धि दरें:
- Actual (Ga)
- Warranted (Gw = s/v)
- Natural (Gn)
- संतुलन शर्त: Ga = Gw = Gn
- समस्या: Knife–Edge Instability
- सीमाएँ: तकनीकी प्रगति की उपेक्षा
➡️ की-वाक्य:
“Harrod–Domar मॉडल में आर्थिक वृद्धि अत्यंत अस्थिर मानी गई है जिसे Knife–Edge स्थिति कहा जाता है।”
7️⃣ Romer & Lucas – Endogenous Growth Models
🔹 Romer Model (Knowledge आधारित)
- तकनीकी प्रगति अंतर्जात
- R&D, Innovation, Increasing Returns
- सरकारी नीति का प्रभाव
🔹 Lucas Model (Human Capital आधारित)
- शिक्षा, कौशल, प्रशिक्षण
- Spillover Effect
- मानव पूँजी से स्थायी वृद्धि
➡️ मुख्य बिंदु:
- Solow से भिन्न – तकनीक बाह्य नहीं, अंतर्जात
- दीर्घकालीन स्थायी वृद्धि संभव
➡️ की-वाक्य:
“Endogenous Growth Theory में ज्ञान और मानव पूँजी आर्थिक वृद्धि के मुख्य स्रोत हैं।”
8️⃣ Macroeconomic Determinants of Growth
मुख्य सीख (लिस्ट लिखें):
- पूँजी संचय
- मानव पूँजी
- तकनीकी प्रगति
- बचत व निवेश दर
- जनसंख्या व श्रम
- प्राकृतिक संसाधन
- राजकोषीय नीति
- मौद्रिक नीति
- व्यापार नीति
- संस्थागत कारक
- अवसंरचना
➡️ की-वाक्य:
“आर्थिक वृद्धि अनेक समष्टि–आर्थिक कारकों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम होती है।”
9️⃣ Cost–Benefit Analysis (Steps & Importance)
🔹 Steps (याद रखने का आसान क्रम):
- परियोजना पहचान
- लागत–लाभ पहचान
- मौद्रिक मापन (Shadow Price)
- Discounting
- Decision Criteria – NPV, BCR, IRR
- Sensitivity Analysis
- Final Decision
🔹 Importance:
- संसाधनों का कुशल आवंटन
- सार्वजनिक निवेश निर्णय
- सामाजिक कल्याण
- वैकल्पिक परियोजना तुलना
➡️ की-वाक्य:
“Cost–Benefit Analysis सार्वजनिक परियोजनाओं के सामाजिक–आर्थिक मूल्यांकन का प्रमुख उपकरण है।”
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